इजराइल और ईरान का विवाद अब किसी सीमा तक सीमित नहीं रहा। यह एक ऐसा संघर्ष बन चुका है, जिसका असर पूरी मुस्लिम दुनिया पर पड़ सकता है। अगर इन दोनों के बीच युद्ध छिड़ता है, तो सीरिया, लेबनान, इराक, यमन और यहां तक कि खाड़ी देशों में भी अस्थिरता आ सकती है।
ईरान, इजराइल पर दबाव बनाने के लिए कई मिलिशिया और संगठनों को समर्थन देता है। हमास, हिजबुल्लाह और हौथी जैसे संगठन पहले ही इजराइल के खिलाफ सक्रिय हैं। वहीं इजराइल की सैन्य ताकत और अमेरिका का समर्थन इसे एक बड़ा रणनीतिक प्लेयर बनाता है। लेकिन इस टकराव में नुकसान सिर्फ इन देशों का नहीं, पूरे मुस्लिम क्षेत्र का होगा।
तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं, लाखों लोग विस्थापित हो सकते हैं और इस्लामी जगत में और विभाजन पैदा हो सकता है। इसके अलावा भारत, पाकिस्तान, तुर्की जैसे देशों पर भी इसका आर्थिक और राजनीतिक प्रभाव पड़ेगा।
अब जरूरत है कि सभी मुस्लिम देश एकजुट होकर एक सशक्त और न्यायप्रिय स्वर उठाएं — ताकि एक और विनाशकारी युद्ध को रोका जा सके।